रामनवमी के दिन भारतीय बाजार बंद रहे लेकिन बाहर से आए संकेतों ने बाजार के मूड पर असर डाला. एशियाई बाजार गिरकर बंद हुए और अमेरिकी फ्यूचर्स में भी कमजोरी दिखी. इसकी बड़ी वजह ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव रहा. डॉनल्ड ट्रंप के ताजा बयान ने माहौल को और उलझा दिया. इसी के साथ रूस और यूक्रेन से जुड़ी घटनाओं ने कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर धकेल दिया. इन सबका असर आने वाले कारोबारी सत्र में भारतीय बाजार पर देखने को मिल सकता है.

ईरान को ट्रंप की चेतावनी

डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिया है. उन्होंने कहा कि ईरान को जल्द समझौते पर गंभीर होना होगा, नहीं तो उसके पास वापसी का कोई रास्ता नहीं बचेगा. यह बयान शांति बातचीत से ज्यादा दबाव जैसा दिख रहा है. ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर समझौता नहीं हुआ तो परिणाम अच्छे नहीं होंगे. उन्होंने ईरान के बातचीत करने वाले लोगों को अलग तरह का बताया और यह दावा भी किया कि ईरान अमेरिका से डील के लिए गुहार लगा रहा है. ट्रंप ने पहले 15 पॉइंट का पीस प्लान देने की बात कही थी, लेकिन उसमें क्या शर्तें हैं यह साफ नहीं है. माना जा रहा है कि उन शर्तों में हॉर्मूस का रास्ता खोलने जैसी बातें शामिल हो सकती हैं. ईरान अभी पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहा और यही वजह है कि तनाव बना हुआ है.

एशियाई बाजार और तेल की चाल

तनाव का असर सीधे एशियाई बाजारों पर पड़ा. निक्केई में गिरावट आई, कॉस्पी भी नीचे बंद हुआ और हैंगसेंग में भी कमजोरी दिखी. निवेशक जोखिम लेने से बचते नजर आए. इसी बीच रूस और यूक्रेन से जुड़ी घटना ने बाजार की चिंता बढ़ा दी. यूक्रेन ने रूस पर ड्रोन हमले किए जिसमें तेल पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा. इससे रूस की करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन की निर्यात क्षमता प्रभावित हुई और कुल निर्यात का बड़ा हिस्सा रुक गया. इसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई और यह करीब 4 प्रतिशत उछलकर 101 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया. अमेरिका के बाजार पिछले सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए थे लेकिन फ्यूचर्स में फिर गिरावट दिख रही है. इससे संकेत मिल रहा है कि बाजार में दबाव बना रह सकता है.

निफ्टी पर असर और अहम स्तर

तेल की कीमतों में तेजी और रुपये पर दबाव ने भारतीय बाजार को लेकर चिंता बढ़ाई है. एक ब्रोकरेज ने 2026 के लिए निफ्टी का लक्ष्य घटाकर 26,000 कर दिया है. इसी के साथ एक कमजोर स्थिति में 19,000 तक जाने की बात भी कही गई है. वजह के तौर पर महंगाई का खतरा और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम होना बताया गया है. निफ्टी अभी एक अहम रेजिस्टेंस के पास खड़ा है. 23,400 के आसपास मजबूत रुकावट दिख रही है जहां पिछले सत्र में 23,465 का हाई बना था. अगर यह स्तर पार होता है तो 23,800 से 23,900 तक जाने की बात की जा सकती है. नीचे की तरफ 23,150 के आसपास सपोर्ट माना जा रहा है. इसके नीचे कमजोरी बढ़ सकती है. पिछले सत्रों में बाजार में तेजी आई थी और निफ्टी 23 मार्च के निचले स्तर से करीब 835 अंक ऊपर आ चुका है. कई लार्ज कैप और मिड कैप शेयर नीचे से संभलते दिखे हैं. बाजार में दो दिन से गैप अप ओपनिंग देखने को मिली है, अब अगर गैप डाउन खुलता है तो यह देखना होगा कि गिरावट कितनी गहरी होती है या फिर खरीदार वापसी करते हैं. अभी माहौल ऐसा है जहां तेजी पर भी संदेह बना हुआ है और चाल सीमित दायरे में रह सकती है.