सरकार की ओर से दिए जाने वाले मुद्रा लोन को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल बने रहते हैं सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या इस योजना के तहत सच में लोन मिलता है या नहीं कई बैंक इस तरह के लोन का ऑफर देते हैं और ब्याज दर के साथ सब्सिडी की बात भी सामने आती है कागजों में यह प्रक्रिया आसान लगती है, लेकिन जब कोई इसे करने जाता है तो कई चरणों से गुजरना पड़ता है सही तरीके से पूरी जानकारी समझकर और हर स्टेप को ध्यान से पूरा करने पर लोन मिलने की संभावना बढ़ जाती है.

एलिजिबिलिटी और योजना का चयन

मुद्रा लोन के लिए आवेदन करने से पहले यह जरूरी होता है कि आवेदक अपनी पात्रता को समझे इसके लिए जनसमर्थन पोर्टल पर जाकर जानकारी भरनी होती है, जहां अलग अलग योजनाओं और लोन की श्रेणियों का विकल्प दिखाई देता है यहां करीब 15 योजनाएं और 8 तरह के लोन विकल्प मौजूद रहते हैं, जिनमें क्रेडिट लोन, किसान लोन, होम लोन और एग्रीकल्चर से जुड़े विकल्प शामिल होते हैं यह साफ किया जाता है कि इस योजना के तहत व्यक्तिगत जरूरत के लिए लोन नहीं दिया जाता, बल्कि केवल बिजनेस शुरू करने या पहले से चल रहे काम को बढ़ाने के लिए ही लोन दिया जाता है.

जब कोई व्यक्ति एलिजिबिलिटी चेक करता है तो उससे उसके काम से जुड़ी जानकारी पूछी जाती है इसमें यह जानना होता है कि वह क्या करता है या क्या शुरू करना चाहता है विकल्पों में हैंडलूम, स्ट्रीट वेंडर, होम स्टे जैसे कई काम शामिल रहते हैं अगर इनमें से कोई विकल्प उपयुक्त नहीं लगता तो अन्य श्रेणी का चयन भी किया जा सकता है.

इसके बाद यह तय करना होता है कि बिजनेस नया शुरू किया जा रहा है या पहले से चल रहा है इसके साथ पढ़ाई, ट्रेनिंग और बिजनेस के प्रकार जैसे मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस या ट्रेडिंग का चयन करना होता है जेंडर, सामाजिक श्रेणी, स्थान और अन्य जानकारी भी इसी चरण में भरी जाती है इन सभी जानकारियों के आधार पर सिस्टम यह तय करता है कि आवेदक किस योजना के तहत लोन के लिए आवेदन कर सकता है.

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प्रोजेक्ट लागत और लोन राशि

एलिजिबिलिटी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगला कदम प्रोजेक्ट की लागत और लोन की राशि तय करना होता है इसमें आवेदक को यह बताना होता है कि उसके बिजनेस में कुल कितना खर्च आने वाला है और वह खुद कितना निवेश करेगा उदाहरण के तौर पर अगर किसी का प्रोजेक्ट 3 लाख रुपये का है और वह खुद 50 हजार रुपये लगाता है, तो बाकी 2.5 लाख रुपये लोन के रूप में मांगे जाते हैं इसी आधार पर सिस्टम लोन की जरूरत का आंकड़ा निकालता है.

जानकारी भरने के बाद पोर्टल पर अलग-अलग लोन विकल्प दिखाई देते हैं मुद्रा योजना के तहत करीब 2.5 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है, जिसमें लगभग 10 प्रतिशत के आसपास ब्याज दर और 5 साल तक की अवधि मिलती है इसके साथ एक और योजना का विकल्प भी दिखता है जिसमें 35 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है और उसमें सब्सिडी भी मिलती है उस योजना में समय ज्यादा दिया जाता है और दस्तावेज भी अधिक मांगे जाते हैं आवेदक अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार इनमें से किसी एक योजना का चयन कर सकता है.

ऑनलाइन आवेदन और दस्तावेज प्रक्रिया

जब योजना का चयन कर लिया जाता है तो आवेदन की प्रक्रिया शुरू होती है इसमें सबसे पहले मोबाइल नंबर डालकर लॉगिन करना होता है और ओटीपी के जरिए सत्यापन किया जाता है इसके बाद ईमेल आईडी डालकर उसे भी ओटीपी से सत्यापित करना होता है और फिर एक पासवर्ड बनाकर आगे बढ़ना होता है इसके बाद फॉर्म में भरी गई सभी जानकारी को एक बार फिर देखा जाता है ताकि कोई गलती न रह जाए

अगले चरण में दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है इसमें पैन कार्ड और आधार कार्ड की जानकारी देना जरूरी होता है पैन नंबर और जन्म तारीख डालकर पैन का सत्यापन किया जाता है, जबकि आधार के लिए ओटीपी भेजा जाता है जिसे दर्ज करना होता है इसके बाद अगर आवेदक का पहले से कोई बिजनेस है तो पिछले 12 महीनों की बिक्री की जानकारी भरनी होती है नया बिजनेस होने की स्थिति में यह जानकारी शून्य भी रखी जा सकती है.

इसके बाद आय से जुड़ी जानकारी देनी होती है, जिसे ऑनलाइन या खुद भरकर जमा किया जा सकता है इसमें बिजनेस का नाम, शुरू होने की तारीख और अन्य वित्तीय जानकारी शामिल होती है बैंक खाते की जानकारी भी देनी होती है ताकि लेनदेन का रिकॉर्ड सामने आ सके इसके बाद बिजनेस से जुड़ी अन्य जानकारी जैसे कर्मचारियों की संख्या, काम का अनुभव और बिजनेस का पूरा पता दर्ज करना होता है.

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आवेदन के अगले हिस्से में यह बताया जाता है कि बिजनेस किराये की जगह पर चल रहा है या खुद की जगह पर इसके साथ यह भी पूछा जाता है कि आवेदक टैक्स देता है या नहीं और उसके पास कोई बीमा पॉलिसी है या नहीं इसके बाद उद्योग और सेक्टर का चयन करना होता है और यह भी बताना होता है कि बिजनेस किस तरह का है लोन का उद्देश्य भी साफ तौर पर बताना होता है, जैसे कि वर्किंग कैपिटल के लिए या मशीन खरीदने के लिए

अंतिम चरण में आवेदक को अपनी मासिक आय और खर्च का अनुमान देना होता है इसमें कर्मचारियों की सैलरी, बिजली का बिल और अन्य खर्च शामिल होते हैं इसके साथ यह भी जानकारी देनी होती है कि पहले से कोई लोन या क्रेडिट कार्ड चल रहा है या नहीं इसके बाद जरूरी दस्तावेज अपलोड करने का विकल्प मिलता है, जिसमें पहचान पत्र, पते का प्रमाण और अन्य जरूरी कागज शामिल होते हैं.

पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवेदन सफल हो जाता है और सिस्टम अलग अलग बैंकों के ऑफर दिखाता है इनमें बैंक ऑफ इंडिया, स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे बैंक शामिल होते हैं, जो अलग अलग ब्याज दर और समय के साथ लोन देने का प्रस्ताव रखते हैं आवेदक इन ऑफर को देखकर अपने अनुसार बैंक का चयन कर सकता है और नजदीकी शाखा की जानकारी भी प्राप्त कर सकता है.

इसके बाद बैंक की तरफ से दस्तावेजों की जांच की जाती है और अंतिम मंजूरी दी जाती है कई बार इस प्रक्रिया में समय लग सकता है और आवेदक को बैंक के साथ लगातार संपर्क में रहना पड़ता है अगर सभी जानकारी सही दी गई है और दस्तावेज पूरे हैं, तो आवेदन आगे बढ़ता है और लोन मिलने की प्रक्रिया पूरी होती है.