साल की शुरुआत में सोने और चांदी की कीमतों ने ऊंचे स्तर को छुआ था लेकिन उसके बाद बाजार का रुख तेजी से बदला कुछ ही समय में कीमतों में गिरावट आने लगी और निवेशकों के बीच बेचैनी बढ़ गई जो लोग ऊंचे भाव पर खरीद कर बैठे थे वे नुकसान के डर से बाहर निकलने लगे जबकि कुछ लोग इस गिरावट को मौका मानकर नजर बनाए हुए हैं.

जनवरी के दौरान सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 5500 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंचा था इसके बाद धीरे धीरे कीमत नीचे आने लगी और अब इसमें काफी गिरावट देखी जा चुकी है इस गिरावट ने बाजार की दिशा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं.

बाजार में उतार चढ़ाव के पीछे क्या वजह रही

दुनिया में चल रहे तनाव का असर हर बाजार पर दिखाई दे रहा है शेयर बाजार से लेकर कच्चे तेल तक और मुद्रा से लेकर कीमती धातुओं तक हर जगह तेजी और गिरावट का सिलसिला बना हुआ है ऐसे माहौल में निवेशक साफ दिशा नहीं पकड़ पा रहे हैं.

आमतौर पर जब तनाव बढ़ता है तो सोने को सुरक्षित माना जाता है लेकिन इस बार स्थिति अलग नजर आई कई निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए अपने निवेश को कैश में बदलना ज्यादा सही समझा इसी वजह से सोने और चांदी पर दबाव बना

पीटर शिफ की राय ने चर्चा को तेज किया

इसी माहौल में मशहूर अर्थशास्त्री Peter Schiff की राय ने बाजार में नई चर्चा शुरू कर दी है उनका कहना है कि मौजूदा गिरावट को केवल कमजोरी के तौर पर देखना सही नहीं होगा उन्होंने कहा कि बाजार में इस तरह की गिरावट पहले भी देखी जा चुकी है और कई बार इसके बाद तेजी आई है उनके मुताबिक अभी जो गिरावट दिख रही है वह आगे आने वाले समय की बड़ी चाल का हिस्सा हो सकती है

2008 की मंदी से जोड़ा जा रहा मौजूदा समय

पीटर शिफ ने अपने तर्क को समझाने के लिए 2008 के समय का उदाहरण दिया है उस दौरान भी पहले सोने में गिरावट आई थी और लोगों को लगा था कि कीमतें और नीचे जाएंगी लेकिन कुछ समय बाद सोने ने तेजी पकड़ ली और निवेशकों को बड़ा फायदा हुआ उनका कहना है कि अभी भी कुछ ऐसा ही पैटर्न बनता दिखाई दे रहा है पहले तेजी आई फिर गिरावट और अब बाजार अगली दिशा की तरफ बढ़ रहा है यह बदलाव धीरे धीरे दिख सकता है

गिरावट के बाद तेजी की उम्मीद क्यों जताई जा रही है

सोने की कीमतों को कई चीजें प्रभावित करती हैं. इस समय दुनिया में कई ऐसे कारण मौजूद हैं. जो आगे चलकर कीमतों को सहारा दे सकते हैं. एक तरफ सरकारों का खर्च बढ़ रहा है दूसरी तरफ रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर आम लोगों पर पड़ रहा है रोजगार को लेकर भी चिंता बनी हुई है ऐसे माहौल में लोग अपने पैसे को सुरक्षित रखने के विकल्प ढूंढते हैं. और सोना उनमें से एक माना जाता है

ब्याज दरों का असर कैसे पड़ता है

बाजार में इस समय ब्याज दरों को लेकर भी चर्चा है अगर महंगाई बढ़ती है तो केंद्रीय बैंक सख्ती बरत सकता है इसी वजह से कुछ निवेशक सोने से दूरी बना रहे हैं. पीटर शिफ का मानना है कि जब अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता है तो केंद्रीय बैंक को दरें घटानी पड़ती हैं. इसके बाद बाजार में पैसा बढ़ता है और इसका असर सोने पर दिखता है ऐसे समय में सोने की कीमतें ऊपर जा सकती हैं.

कुछ रिपोर्ट्स में यह कहा गया है कि आने वाले समय में सोने की कीमतें फिर ऊपर जा सकती हैं. और पुराने स्तर के करीब पहुंच सकती हैं. वहीं पीटर शिफ इससे भी आगे की सोच रखते हैं. और उनका मानना है कि बाजार अभी पूरी तस्वीर नहीं देख पा रहा उनके मुताबिक गिरावट के बाद जो तेजी आती है वह कई बार उम्मीद से ज्यादा बड़ी होती है इसी वजह से कुछ निवेशक अभी से बाजार पर नजर बनाए हुए हैं.

इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि निवेशक क्या करें जो लोग पहले से निवेश कर चुके हैं. वे दुविधा में हैं. और जो नए निवेश की सोच रहे हैं. वे सही समय का इंतजार कर रहे हैं. कई लोग गिरावट देखकर डर रहे हैं. जबकि कुछ इसे धीरे धीरे खरीदारी का समय मानते हैं. बाजार में दोनों तरह की सोच एक साथ चल रही है

क्या तनाव खत्म होने पर सोना कमजोर होगा

कई लोगों को लगता है कि अगर दुनिया में चल रहा तनाव कम हो गया तो सोने की कीमतों पर दबाव आ सकता है लेकिन दूसरी सोच यह है कि तनाव खत्म होने के बाद भी खर्च कम नहीं होता देशों को अपने नुकसान की भरपाई करनी होती है और इसके लिए पैसा खर्च होता है इसका असर महंगाई पर पड़ सकता है और ऐसी स्थिति में सोना कमजोर नहीं बल्कि संभला हुआ रह सकता है

बाजार की चाल को समझना क्यों जरूरी है

सोना और चांदी जैसे निवेश साधन कभी सीधी दिशा में नहीं चलते इनमें उतार और चढ़ाव दोनों आते हैं. जो लोग केवल गिरावट देखकर फैसला लेते हैं. वे अक्सर बाद की तेजी से चूक जाते हैं. इसलिए जरूरी है कि बाजार को समझकर कदम उठाया जाए जल्दबाजी में लिया गया फैसला नुकसान भी करा सकता है. सोने में निवेश करने वाले लोगों के लिए धैर्य सबसे अहम माना जाता है जो लोग समय के साथ टिके रहते हैं. उन्हें कई बार बेहतर रिटर्न देखने को मिलता है बार बार खरीदने और बेचने से फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो सकता है

आखिर में क्या संकेत मिल रहे हैं.

मौजूदा समय में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट जरूर दिख रही है लेकिन इसके पीछे कई बड़े कारण काम कर रहे हैं. बाजार में एक तरफ डर का माहौल है तो दूसरी तरफ कुछ लोग इसे सही समय मान रहे हैं. Peter Schiff की राय ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है उनका मानना है कि अभी जो दिख रहा है वही पूरी कहानी नहीं है और आने वाले समय में बाजार अलग दिशा ले सकता है

सोने का बाजार हमेशा बदलता रहता है और हर गिरावट के बाद नई चाल देखने को मिलती है ऐसे समय में बिना समझे फैसला लेना सही नहीं होता जरूरी है कि हर पहलू को ध्यान में रखकर ही निवेश किया जाए अंत में यही कहा जा सकता है कि मौजूदा गिरावट ने बाजार को दो हिस्सों में बांट दिया है कुछ लोग दूरी बना रहे हैं. और कुछ धीरे धीरे कदम रख रहे हैं. आने वाला समय तय करेगा कि किसकी सोच सही साबित होती है लेकिन इतना साफ है कि बाजार में हलचल अभी खत्म नहीं हुई है