बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की जोड़ी लंबे समय से योग और आयुर्वेद के क्षेत्र में साथ काम करती रही है और हरिद्वार से शुरू हुआ उनका सफर हजारों करोड़ के पतंजलि साम्राज्य तक पहुंच चुका है इसी बीच सोशल मीडिया पर हो रही आलोचनाओं को लेकर आचार्य बालकृष्ण ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया और कुछ वीडियो व पोस्ट हटाने की मांग की
उनका कहना था कि इन सामग्रियों से उनकी छवि प्रभावित हो रही है और यह उनके पर्सनालिटी राइट्स का उल्लंघन है अदालत में सुनवाई के दौरान जस्टिस तुषार राव गेडेला ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्ति को आलोचना का सामना करना पड़ता है और हर टिप्पणी को हटाने की मांग नहीं की जा सकती अदालत ने स्पष्ट किया कि पर्सनालिटी राइट्स का इस्तेमाल आलोचना को रोकने के लिए नहीं किया जा सकता
कोर्ट की टिप्पणी और विवाद
दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान आचार्य बालकृष्ण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स और गूगल से उन पोस्ट और वीडियो को हटाने की मांग की जो उनके अनुसार उनकी छवि को नुकसान पहुंचा रहे थे उन्होंने कहा कि उनकी पर्सनालिटी का गलत उपयोग किया जा रहा है और यह उनकी प्रतिष्ठा पर असर डाल रहा है सुनवाई करते हुए जस्टिस तुषार राव गेडेला ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक जीवन में है तो लोग उसके बारे में बात करेंगे और उसे आलोचना का सामना करना होगा अदालत ने कहा कि पर्सनालिटी राइट्स का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति जायज आलोचना या सार्वजनिक राय को दबा सके अदालत ने यह भी कहा कि लोगों को सार्वजनिक व्यक्तियों पर टिप्पणी करने या उनका मजाक बनाने से नहीं रोका जा सकता, जब तक वह सामग्री अपमानजनक या नीचा दिखाने वाली न हो
गूगल ने अदालत में याचिका का विरोध करते हुए कहा कि बालकृष्ण द्वारा मांगे गए निर्देश खतरनाक हो सकते हैं कंपनी ने कहा कि याचिका के जरिए उन खबरों और टिप्पणियों को हटाने की मांग की जा रही है जो सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों से जुड़ी हैं गूगल का कहना था कि ऐसे आदेश से सार्वजनिक चर्चा प्रभावित हो सकती है इस मामले ने पर्सनालिटी राइट्स को लेकर चल रही बहस को फिर से सामने ला दिया है, क्योंकि इससे पहले भी कई मशहूर हस्तियां अदालत का रुख कर चुकी हैं.
पर्सनालिटी राइट्स की सीमा
अदालत ने इस मामले में पर्सनालिटी राइट्स और आलोचना के बीच अंतर स्पष्ट किया कोर्ट ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के नाम या चेहरे का उपयोग करके कोई उत्पाद बेचा जाता है तो यह गलत है और पर्सनालिटी राइट्स लागू होते हैं लेकिन अगर कोई व्यक्ति किसी सार्वजनिक व्यक्ति के दावों पर सवाल उठाता है या खबर दिखाता है तो इसे पर्सनालिटी राइट्स का उल्लंघन नहीं माना जा सकता अदालत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति आचार्य बालकृष्ण की फोटो लगाकर नकली च्यवनप्राश बेचता है तो यह गलत होगा, लेकिन यदि कोई वीडियो बनाकर उनके दावों पर चर्चा करता है तो उसे रोका नहीं जा सकता
पर्सनालिटी राइट्स को प्रचार अधिकार भी कहा जाता है, जिसमें किसी व्यक्ति का नाम, आवाज, चेहरा और पहचान उसकी संपत्ति मानी जाती है बिना अनुमति किसी की फोटो लगाकर सामान बेचना या आवाज की नकल करके लोगों को भ्रमित करना गलत माना जाता है अदालत ने स्पष्ट किया कि आलोचना और व्यावसायिक उपयोग दोनों अलग चीजें हैं और उन्हें एक ही श्रेणी में नहीं रखा जा सकता
रामदेव-बालकृष्ण की साझेदारी
आचार्य बालकृष्ण और बाबा रामदेव की साझेदारी हरियाणा के एक गुरुकुल से शुरू हुई थी दोनों के पास संसाधन सीमित थे लेकिन आयुर्वेद को लोगों तक पहुंचाने का लक्ष्य था 1990 के दशक में दोनों हरिद्वार में साइकिल से घूमकर मुफ्त दवाइयां बांटते थे बाबा रामदेव योग सिखाते थे और बालकृष्ण जड़ी-बूटियों की जानकारी देते थे 1995 में हरिद्वार में दिव्य योग मंदिर की स्थापना के साथ उनका काम व्यवस्थित रूप से शुरू हुआ
जब बाबा रामदेव टीवी पर लोकप्रिय हुए तो पतंजलि का विस्तार तेजी से बढ़ा और प्रबंधन की जिम्मेदारी आचार्य बालकृष्ण ने संभाली आज बाबा रामदेव पतंजलि का चेहरा माने जाते हैं जबकि आचार्य बालकृष्ण को कंपनी की मुख्य ताकत माना जाता है बताया जाता है कि पतंजलि आयुर्वेद में 94 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी बालकृष्ण के पास है इसी कारण जब भी कंपनी से जुड़े विवाद सामने आते हैं तो कानूनी जिम्मेदारी उन तक पहुंचती है.
आचार्य बालकृष्ण नेपाल में जन्मे और गुरुकुल में पढ़ाई की उन्हें जड़ी-बूटियों का जानकार माना जाता है और उन्होंने आयुर्वेद पर कई किताबें लिखी हैं उनके खिलाफ पहले भी फर्जी डिग्री और भ्रामक विज्ञापनों को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं सोशल मीडिया पर उनके बारे में मीम और आलोचनाएं भी सामने आती रहती हैं, जिसके कारण उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया
अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि सार्वजनिक पहचान रखने वाले व्यक्ति को आलोचना और चर्चा का सामना करना पड़ता है कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रसिद्धि के साथ लोगों की राय भी आती है और उसे पूरी तरह रोका नहीं जा सकता अदालत की टिप्पणी के बाद यह मामला पर्सनालिटी राइट्स और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन की चर्चा का विषय बन गया है.