भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक अहम जानकारी सामने आई है जहां देश का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार दूसरे हफ्ते गिरावट के साथ नीचे आया है. भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ एक हफ्ते में करीब 11.41 बिलियन डॉलर की कमी दर्ज की गई है. अब कुल भंडार करीब 698 बिलियन डॉलर रह गया है. यह गिरावट उस समय आई है जब कुछ ही समय पहले फरवरी में यह भंडार 728 बिलियन डॉलर के स्तर पर था. ऐसे में ऊपर से नीचे आने का यह बदलाव ध्यान खींच रहा है और लगातार दो हफ्तों में कमी ने इस रुझान पर नजर बनाए रखने की जरूरत बढ़ा दी है.
दो हफ्तों के भीतर करीब 18 बिलियन डॉलर की कमी दर्ज की गई है क्योंकि इससे पहले भी लगभग 7 बिलियन डॉलर का नुकसान हो चुका था. इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह सोने की वैल्यू में कमी बताई जा रही है. देश के गोल्ड रिजर्व की कीमत एक ही हफ्ते में करीब 13 बिलियन डॉलर घट गई है. सोना आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है लेकिन इस बार इसकी कीमत में गिरावट का असर सीधे पूरे फॉरेक्स रिजर्व पर पड़ा है. विदेशी मुद्रा संपत्ति जो रिजर्व का बड़ा हिस्सा होती है उसमें हल्की बढ़त जरूर दर्ज की गई है, लेकिन यह बढ़त सोने में आई गिरावट के मुकाबले काफी कम रही. इसी कारण कुल भंडार पर दबाव बना हुआ दिखाई देता है.
फॉरेक्स रिजर्व के अलग अलग हिस्सों में भी हलचल देखी गई है. स्पेशल ड्राइंग राइट्स यानी SDR में हल्की कमी आई है. यह अंतरराष्ट्रीय रिजर्व का एक हिस्सा होता है. वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ भारत की स्थिति में थोड़ा सुधार दर्ज किया गया है. फिर भी ये छोटे बदलाव कुल तस्वीर को ज्यादा प्रभावित नहीं कर पाए. बड़ी बात यही रही कि कुल भंडार में गिरावट जारी रही और यह लगातार दूसरे हफ्ते दर्ज हुई.
आम लोगों पर असर
अगर यह गिरावट आगे भी जारी रहती है तो इसका असर सीधे रुपये पर पड़ सकता है. रुपया कमजोर होने की स्थिति में आयात महंगा हो सकता है. इसका असर तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी चीजों पर दिखाई दे सकता है जिससे कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है. ऐसे हालात में बाजार पर भी असर पड़ने की संभावना रहती है क्योंकि विदेशी निवेशक स्थिति को देखकर अपना पैसा निकाल सकते हैं. अभी देश के पास मजबूत भंडार मौजूद है लेकिन लगातार गिरावट का यह क्रम आने वाले समय में नजर बनाए रखने वाला संकेत बन गया है.